गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है? जाने इसका महत्व और कहनियाँ - NewMsg -->
ganesh chaturthi 2020

गणपति :- गण अर्थात किसी समान उद्देश्य वाले लोगों का समूह। पति अर्थात स्वामी। तो गणपति हुए समूह के स्वामी। 

ये गणेश चतुर्थी हिन्दू त्योहारों में सबसे प्रचलित त्योहारों में से एक है भारत के अलग अलग हिस्सों में गणेशोत्सव मनाया जाता है। खास तौर पर महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी 10 दिन का उत्सव है।

लोग अपने घरों में गणेश जी की स्थापना करते हैं। खासतौर पर तब जब उनके मन में कोई इच्छा कोई मनोकामना होती है। गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। इसका समापन अनंत चतुर्थी के दिन होता है। पुराणों के मुताबिक गणेश चतुर्थी उनके जन्म मतलब उनके अवतरण की खुशी में मनाया गया था।

गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा:

वैसे शिव पुराण के अंतर्गत माता पार्वती ने स्नान करने के पहले अपनी मैल से एक बालक की आकृति बनाई और उसे प्राण दिए। उस बालक को उन्होंने अपना द्वार पाल बनाया और सख्त हिदायत दिया कि किसी को भी अंदर प्रवेश न दे। बालक मां पार्वती के कहे अनुसार वहां खड़ा हो गया। उसी समय शिव जी आए बालक ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।

इस पर क्रोधित होकर शिव के गणों ने उस बालक से युद्ध किया पर बालक से पराजित हो गए। भगवान शिव ने बालक के इस कृत्य को उसकी उद्दंडता मानकर और अपने त्रिशूल से उसके सर को धड़ से अलग कर दिया। माता पार्वती को जब इस बात का पता चला ज्ञान हुआ तो वे बड़ी दुखी हुई और क्रोधित भी माता पार्वती ने प्रलय करने की ठान ली।

गणेश चतुर्थी क्या होता है : Ganesh Chaturthi kya hota hai

ganesh chaturthi 2020

इससे घबराकर सारे देवतागण देव ऋषि नारद की सलाह पर माता पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए मां जगदम्बा की स्तुति की और विष्णु जी ने उत्तर दिशा में जाकर सबसे पहले मिलने वाले जीव का सर ले आए। उसे उस बालक के धड़ पर रख कर पुनर्जीवित कर दिया।

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इस बालक का माता पार्वती के प्रति प्रेम को देखते हुए भगवान श्री ब्रह्मा विष्णु महेश ने उस बालक को सर्वाधिक दक्ष अग्र पूज्य होने का वरदान दिया क्योंकि बालक को गजराज का सर लगाया था। इससे उनका नाम गजानन पड़ा। ऐसे और भी कई नाम हैं।

हमारे गजानन के जैसे गणपति गणेश गज मुख विघ्नहर्ता विनायक। गौरी नंदन इसीलिए जब कभी कहीं पूजा होती है गणेश जी सर्व प्रथम पूजे जाते हैं।

गणेश चतुर्थी का महत्व :

दोस्तो अन्य कथा ऐसी है। कहते हैं पेशावर ने गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया था। कस्बा गणपति नाम से प्रसिद्ध गणपति की स्थापना शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई ने की थी लेकिन लोक मान्य बालगंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को जो स्वरूप दिया वो सराहनीय है। इससे गणेशोत्सव राष्ट्र एकता का प्रतीक बन गया।

तिलक के प्रयास से पहले गणेश पूजा परिवार तक ही सीमित थी। पूजा को सार्वजनिक रूप दिए देते समय उसे केवल धार्मिक कर्मकाण्ड तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि आज़ादी की लड़ाई छुआछूत दूर करने और समाज को संगठित करने को। उसे ज़रिया बनाया और उसे एक आन्दोलन का स्वरूप दिया।

इस आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य की नीव हिला ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दोस्तों जाते जाते मेरी आपसे एक विनम्र निवेदन है कृपया गणपति भगवान के इस पावन पर्व के उत्सव में उनकी गीत उनकी स्तुति ही करें।

जितनी आदर भाव से हम गणेश जी को घर में लाते हैं पूजा करते हैं उतने ही आदरभाव और सम्मान के साथ उनका विसर्जन करें। गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं,  इको फ्रेंडली गणेशोत्सव मनाए और मेरे साथ कहे। 
'गणपति बप्पा मोरिया, मंगलमूर्ति मोरया '

गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है? जाने इसका महत्व और कहनियाँ

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गणपति :- गण अर्थात किसी समान उद्देश्य वाले लोगों का समूह। पति अर्थात स्वामी। तो गणपति हुए समूह के स्वामी। 

ये गणेश चतुर्थी हिन्दू त्योहारों में सबसे प्रचलित त्योहारों में से एक है भारत के अलग अलग हिस्सों में गणेशोत्सव मनाया जाता है। खास तौर पर महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी 10 दिन का उत्सव है।

लोग अपने घरों में गणेश जी की स्थापना करते हैं। खासतौर पर तब जब उनके मन में कोई इच्छा कोई मनोकामना होती है। गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। इसका समापन अनंत चतुर्थी के दिन होता है। पुराणों के मुताबिक गणेश चतुर्थी उनके जन्म मतलब उनके अवतरण की खुशी में मनाया गया था।

गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा:

वैसे शिव पुराण के अंतर्गत माता पार्वती ने स्नान करने के पहले अपनी मैल से एक बालक की आकृति बनाई और उसे प्राण दिए। उस बालक को उन्होंने अपना द्वार पाल बनाया और सख्त हिदायत दिया कि किसी को भी अंदर प्रवेश न दे। बालक मां पार्वती के कहे अनुसार वहां खड़ा हो गया। उसी समय शिव जी आए बालक ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।

इस पर क्रोधित होकर शिव के गणों ने उस बालक से युद्ध किया पर बालक से पराजित हो गए। भगवान शिव ने बालक के इस कृत्य को उसकी उद्दंडता मानकर और अपने त्रिशूल से उसके सर को धड़ से अलग कर दिया। माता पार्वती को जब इस बात का पता चला ज्ञान हुआ तो वे बड़ी दुखी हुई और क्रोधित भी माता पार्वती ने प्रलय करने की ठान ली।

गणेश चतुर्थी क्या होता है : Ganesh Chaturthi kya hota hai

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इससे घबराकर सारे देवतागण देव ऋषि नारद की सलाह पर माता पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए मां जगदम्बा की स्तुति की और विष्णु जी ने उत्तर दिशा में जाकर सबसे पहले मिलने वाले जीव का सर ले आए। उसे उस बालक के धड़ पर रख कर पुनर्जीवित कर दिया।

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इस बालक का माता पार्वती के प्रति प्रेम को देखते हुए भगवान श्री ब्रह्मा विष्णु महेश ने उस बालक को सर्वाधिक दक्ष अग्र पूज्य होने का वरदान दिया क्योंकि बालक को गजराज का सर लगाया था। इससे उनका नाम गजानन पड़ा। ऐसे और भी कई नाम हैं।

हमारे गजानन के जैसे गणपति गणेश गज मुख विघ्नहर्ता विनायक। गौरी नंदन इसीलिए जब कभी कहीं पूजा होती है गणेश जी सर्व प्रथम पूजे जाते हैं।

गणेश चतुर्थी का महत्व :

दोस्तो अन्य कथा ऐसी है। कहते हैं पेशावर ने गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया था। कस्बा गणपति नाम से प्रसिद्ध गणपति की स्थापना शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई ने की थी लेकिन लोक मान्य बालगंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को जो स्वरूप दिया वो सराहनीय है। इससे गणेशोत्सव राष्ट्र एकता का प्रतीक बन गया।

तिलक के प्रयास से पहले गणेश पूजा परिवार तक ही सीमित थी। पूजा को सार्वजनिक रूप दिए देते समय उसे केवल धार्मिक कर्मकाण्ड तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि आज़ादी की लड़ाई छुआछूत दूर करने और समाज को संगठित करने को। उसे ज़रिया बनाया और उसे एक आन्दोलन का स्वरूप दिया।

इस आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य की नीव हिला ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दोस्तों जाते जाते मेरी आपसे एक विनम्र निवेदन है कृपया गणपति भगवान के इस पावन पर्व के उत्सव में उनकी गीत उनकी स्तुति ही करें।

जितनी आदर भाव से हम गणेश जी को घर में लाते हैं पूजा करते हैं उतने ही आदरभाव और सम्मान के साथ उनका विसर्जन करें। गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं,  इको फ्रेंडली गणेशोत्सव मनाए और मेरे साथ कहे। 
'गणपति बप्पा मोरिया, मंगलमूर्ति मोरया '

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